हरेक के पास कहने लिए कुछ-न-कुछ होता है, मेरे पास भी है.
कॉलम 'आजकल' के अंतर्गत आप अवगत होंगे समसामयिक घटना-परिघटना के इर्दगिर्द मेरे मन में आये ख्यालों और विचारों से. हो सकता है कि यहां किसी पर कोई आक्षेप भी हो, मगर इरादतन ऐसा नहीं किया गया है.
यह वक्ती तौर पे मेरे में मन जो उद्वेग उठा, जो प्रतिक्रिया हुई, उसका आइना है.
कितनी ख़ुशी चाहिए सोनू निगम को
एक नामी समाचार पत्र को दिए एक इंटरव्यू में गायक सोनू निगम (कभी टॉप पर थे, आजकल किस पायदान पर हैं, पता नहीं!) कहते हैं- "कभी कोई हैप्पी मैरिड कपल नहीं देखा"! अब इसके कई मायने हो सकते हैं!! या तो वे अपनी शादीशुदा जिंदगी से परेशान हैं, जिसकी तल्खियत उन्हें गहरे साल रही हो या फिर दुनिया के कुछ लोगों को परेशान देखकर उन्होंने अपनी एक राय कायम कर ली. सच क्या है, ये तो वही जानते होंगे.
मेरा मानना है, 'हैप्पी' माने खुश या सुखी होना एक तुलनात्मक विषयवस्तु है और यह पूरी तरह 'सब्जेक्टिव' है. किसी को दो सूखी रोटी और बैंगन का भर्ता खाने से ख़ुशी मिल सकती है तो किसी को हो सकता है, चीज़ पिज्जा, रसमलाई, पनतोबा से भी संतुष्टि न हो. अब सोनू निगम ने कभी कोई हैप्पी मैरिड कपल नहीं देखा तो इसमें किसका दोष है? चीजों को देखने का एक नजरिया होता है. इस नजरिया के कारण ही हमें कभी गिलास आधा खाली दिखता है तो कभी आधा भरा हुआ.
यह सही है कि दुनियादारी के साथ-साथ 'मैरिड लाइफ' की कई परेशानियां हैं. उसकी अपनी कई दुश्वारियां हैं. मगर जहां तक मैं समझता हूं, अगर जीवन में परेशानियां हैं तो परेशानियों का समाधान ढूंढा जाता है, उनका निराकरण किया जाता है. कुछ परेशानियां हमारे प्रयास से दूर हो जाती हैं, कुछ समय के साथ स्वतः दूर हो जाती हैं तो कुछ नहीं भी होती हैं. जो नहीं होती हैं, उन्हें शायद हम नियति भी मान लेते हैं.
सोनू निगम ने जीवन में निस्संदेह वो मुकाम हासिल किया, जो अधिकांश लोगों के लिए ख्वाब ही है. उनके खाते में कई सफलताएं दर्ज हैं. जिसपर उन्हें ही नहीं आम-ओ-खास को भी गर्व है. मगर आज जब वे अपने करियर के ढलान पर हैं, तो शायद उन्हें दुनिया फीकी नज़र आने लगी है. होता है, कई बार ऐसा भी होता है. शायद ये उनकी खीज है.
जब मैंने अपने एक मित्र से इस बात कि चर्चा की तो उन्होंने सोनू निगम के इस बयान का एक और रुख स्पष्ट किया. मेरे मित्र ने कहा कि अपने से अधिक सुखी मैरिड कपल को देखकर सोनू निगम को लगा होगा कि वे कितने कम सुखी हैं (उनके कम सुखी होने के कई कारण आहे-बगाहे अखबारों में छपते रहे हैं.)
खैर, आपको बता दें, सोनू निगम को अमेरिकी नागरिकता का ग्रीन कार्ड मिलने में कुछेक दिन ही देर है. ये हमारे लिए ख़ुशी की बात है क्योंकि हम तो हमेशा खुश रहते हैं...है कि नहीं.
